
पंजाब के सियालकोट शहर में 20 जुलाई 1927 को जन्मे राजेंद्र कुमार हिंदी फिल्मी जगत के एक बहुत ही सफल अभिनेताओं में से रहे राजेंद्र कुमार को उनकी सफलता की वजह से ही जुबली कुमार के उपाधि से सम्मानित किया गया था पहचाना जाता था।
राजेंद्र कुमार ने अपने फिल्मी दुनिया में कदम 1950 में आई फिल्म जोगन पर रखा के बाद उन्हें बहुत प्रस्तुति प्राप्त हुई 1957 में मदर इंडिया मदर इंडिया इस फिल्म में उन्होंने नरगिस के बेटे की भूमिका अदा की थी यह उनकी बहुत ही शानदार भूमिका रही जिनसे उन्हें वहां पर प्रसिद्धि मिली उसके बाद लगातार वह फिल्में करते रहे और 1959 में आई फिल्म गूंज उठी शहनाई ने उन्हें सफलता के मुकाम तक पहुंचाया बतौर नायक उनकी सबसे कामयाब फिल्म रही इसके बाद आने वाले साठ के दशक में वह काफी मशहूर है लगातार सिल्वर जुबली में उनके फिल्म जाती रही इसी के कारण उनका नाम जुबली कुमार पड़ गया उनकी फिल्म में 1959 में आए धूल का फूल ,दिल एक मंदिर है ,आरजू प्यार का सागर ,दाग ,सूरज ,तलाश, मेरे महबूब ,झुक गया आसमान ,जिंदगी ,आई मिलन की बेला, द ट्रेन, ससुराल, शतरंज, कानून ,मां-बाप ,आन बान ,सुनहरा, संसार ,पतंगा, आप आए बाहर आए, यह कुछ गिने-चुने फिल्में हैं।
उम्र के दूसरे दौर में भी उन्होंने यहां पर एक कामयाब पारी खेली उन्होंने कई सारे सफल भूमिकाओं में चरित्र भूमिका निभाई 80 के दशक में उनकी फिल्में देखने लायक थी उन्होंने कई सारे हिंदी के साथ-साथ अन्य भाषाओं में काम किया है ज्यादातर उन्होंने पंजाबी फिल्म में काम किया

अपने बेटे कुमार राम कुमार गौरव को, लेकर लव स्टोरी नामक एक बेहद सफल फिल्म का निर्माण किया । इस फिल्म के निर्माता और निर्देशक होने के साथ-साथ फिल्म में उन्होंने कुमार गौरव के बाप की भूमिका भी अदा की थी यह फिल्म काफी सफल रही।
मदर इंडिया में भाई बने सुनील दत्त के साथ उनकी दोस्ती काफी गहरी थी इसी दोस्ती को आगे चलकर उन्होंने रिश्तेदारी में बदल दिया अपने बेटे कुमार गौरव की शादी सुनील दत्त की बेटी नम्रता के साथ की। ।
ऐसे हर दिल अजीज राजेंद्र कुमार जुबली कुमार की मृत्यु 12 जुलाई 1999 को कैंसर की बीमारी से जूझते हुए हुई।

